पर्यावरण बचाना है--सबको पेड़ लगाना है!!---धरती हरी भरी रहे हमारी--अब तो समझो जिम्मेदारी!! जल ही जीवन-वायू प्राण--इनके बिना है जग निष्प्राण!!### शार्ट एड्रेस "www.paryavaran.tk" से इस साईट पर आ सकते हैं

पर्यावरण संरक्षण हमारा कर्तव्य ही नहीं, धर्म भी है

>> रविवार, 9 मई 2010

हमारा पर्यावरण का उद्देश्य धरती पर हो रहे पर्यावरण के क्षरण के प्रति जागरुकता लाना है। इस ब्लाग पर हम प्रयावरण सबंधी लेखों का प्रकाशन करेंगे तथा उन्हे स्थान देंगे। पर्यावरण के प्रदूषण से वातावरण में निरंतर बदलाव हो रहा है। गर्मी, सर्दी, वर्षा आदि ॠतुओं के समय में परिवर्तन हो रहा है। समय चक्र पर पर्यावरण प्रदुषण का असर पड़ रहा है।

जहां वर्षा-शीत-गर्मी अधिक होती थी वहां न्युनता हो गयी है, मानसून कहीं पर समय से पहले आ जाता है कहीं निर्धारित समय के पश्चात आता है। जिससे फ़सल चक्र में परिवर्तन हो रहा है। किसान को इससे नुकसान उठाना पड़ रहा है। समय पर पानी उपलब्ध नहीं हो पाता और फ़सल सूख  जाती है।

हमने देखा है कि बचपन में कि घरों में मच्छर नहीं होते थे। लोग मलेरिया आदि बिमारी से कम ग्रसित होते थे। जनसंख्या बढने के साथ आवास भी बढे, लेकिन गंदे पानी के निकास की उचित व्यवस्था न होने से नालियों में मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। गंदी नालियों एवं ठहरे हुए पानी में अंडे देने के कारण मच्छर तीव्रता से बढते हैं, जिससे जल जनित तथा मच्छर जनित रोग बढने की आशंका बलवती हो जाती है।

वातावरण में धूल धुंवा होने से अस्थमा एवं चर्म रोग के मरीज नित बढते जा रहे हैं। पेड़ ना होने से यह नुकसान उठाना पड़ रहा है। जो वातावरण हमारे पु्र्वजों ने हमें विरासत के रुप में दिया है जी्ने के लिए, हमारा भी कर्तव्य बनता है कि हम भी वैसा ही वातावरण अपनी आने वाली पीढी को दें। जिससे वे एक रोग मुक्त वातावरण में जी सकें।
पर्यावरण संरक्षण हमारा कर्तव्य ही नहीं, धर्म भी है। आइए इसे बचाने में सहयोग करें। यह मेरी प्रथम पोस्ट है आपका सहयोग अपेक्षित है।

8 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा 9 मई 2010 को 8:19 pm  

आपने ब्लाग के लिए एक गंभीर विषय चुना है।
पर्यावरण के नुकसान का खामियाजा हम सबको ही भरना पड़ेगा।

आपके शो्ध अनुभवों का लाभ सभी को मिलेगा।

ब्लाग जगत में आपका स्वाग़त है।

Ratan Singh Shekhawat 10 मई 2010 को 6:55 am  

पर्यावरण संरक्षण हमारा कर्तव्य ही नहीं, धर्म भी है।
@ आपके इन वाक्यों से १००% सहमत

E-Guru Rajeev 10 मई 2010 को 4:58 pm  

हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

शुभकामनाएं !


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M VERMA 17 मई 2010 को 5:30 am  

स्वागत है इस प्रथम पोस्ट का. विषय सार्थक है. यह आलेख भी प्रभावी है.

Udan Tashtari 17 मई 2010 को 6:03 am  

स्वागत है आपका. नियमित लेखन और जागरुकता के लिए शुभकामनाएँ.

honesty project democracy 17 मई 2010 को 7:50 am  

उम्दा प्रस्तुती ,ये नेता लोग अगर पर्यावरण के नाम पर सिर्फ भ्रष्टाचार की गंगा में पैसा बनाना छोड़ दें, तो निश्चय ही पर्यावरण को एक सुरक्षित मुकाम दिया जा सकता है / लेकिन इसके नाम पर तो सरकार द्वारा ढोंग रचा जा रहा है /

Gulzarilal Nanda Foundation 29 जनवरी 2013 को 10:15 am  

पर्यावरण जागरूकता में समाज जागरण में आपके सार्थक प्रयास के लिए सुभ कामनाये ,पूर्व प्रधानमन्त्री भारतरत्न नंदा जी की स्म्रति में सदाचार जागरण प्रयास में हम आपको सहभागिता मंच में प्ररेणा ज्योति कार्य में शामिल कर रहे हैं .भारत नव निर्माण जनक्रांति रचनात्मक संचार में गुलजारीलाल नंदा फाउंडेशन स सम्मान जीवित समाज को आगे लाने में अभिनंदन करता है .श्रीमती राजश्री ठाकुर सचिव गुलजारीलाल नंदा फाउंडेशन Email.gnf2012@gmail.com

sudhir kumar jahire 6 नवंबर 2015 को 3:18 pm  

हम लोगों ने पर्यावरण संरछण समिति मिसदा का गठन किया है और पौधा रोपड़ कर रहे है देखते है कितना पौधा लगा पाते है

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