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फल से लदी डालियों से, नित सीखो शीश झुकाना

>> मंगलवार, 4 अक्तूबर 2011


धान का कटोरा गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी लहलहा रहा है , पिछले वर्ष धान के रिकार्ड उत्पादन के लिए केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को पुरष्कार दिया था . ईश्वर ने चाहा तो इस साल भी रिकार्ड बनेगा .  खरीफ  सीजन की  धान की फसल पकने को  तैयार है  . कुछ ही दिनों में काटने लायक हो जायेगी . सितंबर के महीने में ही  धान की बालियों में दूध भर आया था जो धीरे धीरे  चांवल के रूप में तब्दील हो जाता है . दूध भर आने के बाद धान की बालियाँ झुक जाती है . प्राथमिक शाला में पढाया भी जाता है ---
फूलों से नित हंसना सीखो, भौरों से नित गाना ;
फल से लदी डालियों से, नित सीखो शीश झुकाना ; 

 

5 टिप्पणियाँ:

राजभाषा हिंदी 9 नवंबर 2011 को 10:57 pm  

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

आशा जोगळेकर 7 मार्च 2012 को 3:01 pm  

बहुत सुंदर प्रस्तुति । प्रकडति हमें कितना कुछ सिखाती रहती है पर क्या हम सीखते हैं ।

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