पर्यावरण बचाना है--सबको पेड़ लगाना है!!---धरती हरी भरी रहे हमारी--अब तो समझो जिम्मेदारी!! जल ही जीवन-वायू प्राण--इनके बिना है जग निष्प्राण!!### शार्ट एड्रेस "www.paryavaran.tk" से इस साईट पर आ सकते हैं
दीवाली लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दीवाली लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

प्रदूषण के डर से , ना निकला घर से ;

>> रविवार, 7 नवंबर 2010

प्रदूषण  के डर से ,
ना निकला घर से ;


पटाखों की लड़ियाँ ,
और फुलझड़ियाँ ,
सुहाने चमन  में ,
कहर  बन के बरसे ;
प्रदूषण  के डर से ,
ना निकला घर से ;

हर मोड़ पर है मधुशाला ,
हर हाथ में मस्ती का प्याला ;
कैसे बचाऊँ  तुम्हें ,
इस जहर से ;
प्रदूषण  के डर से ,
ना निकला घर से ;

कहाँ है दिवाली ,
कहाँ खुशहाली ;
उसे देखनें को ,
ये नैना तरसे ;
प्रदूषण  के डर से ,
ना निकला घर से ;

तूफां में जलते दीयों के नजारें ,
घनें बादलों में छिपे है सितारे ;
जाऊँ तो कैसे ,
पथरीली डगर  से ; 
प्रदूषण के डर से ,
ना निकला घर से ;

साल के बाद आयेगी फिर से दिवाली ,
झोली रहें ना किसी की खाली ;
ब्लॉग से ही बधाई हो ,
मेरी तरफ से  ;
प्रदूषण के डर से ,
ना निकला घर से ;

कृपया इस  कविता को यहाँ भी पढ़े

Read more...

  © Blogger template Webnolia by Ourblogtemplates.com 2009

Back to TOP