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पृथ्वी को बचाएं--पॉलीथिन का बहिष्कार करें

>> शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

हमारी आजादी को ६३ वर्ष बीत चुके हैं. इस अवधि में पर्यावरण को बहुत अधिक नुकसान हुआ है. जंगल कटे हैं, पहाड़ों को खोदा गया, धरती के गर्भ से खनिज का उत्खनन द्रुत गति से हुआ है. जिसके कारण पर्यावरण संतुलन बिगड़ा है. जलवायु परिवर्तन पर इसका काफी असर पड़ा है. विकास के नाम पर प्राकृतिक क्षरण द्रुत गति से हुआ है. प्रकृति से सिर्फ प्राप्त करने की कोशिश की गयी, लेकिन उसके संरक्षण के लिए कोई स्थायी उपाय नहीं तय किया गया. विकास के साथ एक समस्या प्लास्टिक के रुप में हमारे सामने आई। जिस समय प्लास्टिक का निर्माण हुआ होगा उस समय इससे जुड़ी समस्याओं पर ध्यान न देकर इसके उपयोग पर ही ध्यान केन्द्रित किया गया। लेकिन अब प्लास्टिक और पॉलीथिन एक बहुत बड़ी समस्या पर्यावरण एवं प्राणी जीवन के बन गया है।
सबसे अधिक नुकसान तो पालीथिन के थैलियों से हुआ है। इससे पशुओं की हानि बहुतायत में हो रही है। पालीथिन के बैग में तो हम सामान ले आते हैं और उसे कुड़े के ढेर में फ़ेंक देते हैं, जानवर लालच में आकर उसे खा जाता है और उसका जीवन खतरे में पड़ जाता है तथा उसकी मौत तक हो जाती है। पॉलीथिन का कचरा खत्म होने में बहुत समय लगता है तथा इसे लोग कुड़े कचरे से चुग कर विनिर्माण के लिए कबाड़ियों को बेच देते हैं।--पालीथिन को जलाने से कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड एवं डाईऑक्सीन्स जैसी विषैली गैसें उत्सर्जित होती हैं. इनसे सांस, त्वचा आदि की बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है. 
एक अध्ययन में बताया गया है कि पालीथिन एवं प्लास्टिक के विषैले पन के कारण इसके अधिक सम्पर्क में रहने वाली स्त्रियों के गर्भ में शिशु का विकास रुक जाता है तथा अविकसित संतान पैदा होने का खतरा बढ जाता है। प्लास्टिक प्रजनन अंगों  को भी नुकसान पहुंचा रहा है। इसमें प्रयोग होने वाला बिस्फेनॉल रसायन शरीर में डायबिटीज व लिवर एंजाइम को असामान्य कर देता है. जिससे डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ रही है। इसके कचरे के दुष्प्रभाव के कारण लाखो जीवों की मौत एक वर्ष में हो जाती है। ओजोन की परत में हुए छेद का मुख्य कारण प्लास्टिक को ही माना जा रहा है।
नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी के अध्ययन करने वालों ने बताया है कि उसमें मानव जाति का संहार आग से जलने से बताया है। हो सकता है उसकी भविष्यवाणी सच हो जाए। क्योंकि आज संसार के हर घर में ज्वलनशील प्लास्टिक का सामान है जो बहुत जल्दी आग पकड़ता है। पहले मिट्टी के घरों में जलने लायक सामान सिर्फ़ कपड़े अनाज और मकान की लकड़ियाँ ही होती थी। लेकिन जब से घरों में प्लास्टिक ने प्रवेश किया है तब से आग लगने पर कुछ मिनटों में घर जल कर राख हो जाता है। फ़ायर ब्रिगेड पहुंचने से पहले ही सब खत्म हो चुका होता है।
अब समय आ गया है प्लास्टिक के बहिष्कार करने का। उसका कम से कम याने न्युनतम उपयोग करने का। अगर हम जागरुक हो जाते हैं तो अवश्य ही इस बहुत बड़ी आपदा से बचा जा सकता है। हमें पुन: कागज के बैगों की तरफ़ जाना होगा। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा और पर्यावरण की रक्षा भी होगी। पर्यावरण को बचाना हमारा मुख्य ध्येय होना चाहिए। पृथ्वी की हरीतिमा को हमें बचाना है। पर्यावरण के प्रदुषण को खत्म नहीं कर सकते तो कम अवश्य करना है। हम प्लास्टिक उपयोग स्वयं ही कम करें तथा अपने इष्ट मित्रों को इसका उपयोग कम करने सलाह दे। प्रकृति के प्रति यह हमारा नैतिक दायित्व बनता है। क्यों करेंगे ना! प्लास्टिक का उपयोग कम?

5 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा-للت شرما 20 अगस्त 2010 को 7:10 am  

प्लास्टिक से बचना अब बहुत जरुरी हो गया है।
पर्यावरण के साथ-साथ प्राणियों के जीवन को खतरा उत्पन्न हो गया है।
इसलिए समय रहते चेत जाएं तो लाभदायक है।

बढिया आलेख
आभार

आशा जोगळेकर 20 अगस्त 2010 को 8:50 am  

बहुत सामयिक आलेख जो चेतावनी दे रहा है ।

महेन्द्र मिश्र 20 अगस्त 2010 को 9:06 am  

पालीथीन का हर हॉल में बहिष्कार किया जाना चाहिए...
बहुत सुन्दर प्रेरक प्रसंग ...आभार

संगीता पुरी 20 अगस्त 2010 को 10:52 am  

समय रहते चेतना अधिक आवश्‍यक है .. बहुत बढिया आलेख है !!

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